विश्वशास्त्र की विषय सूची
विशय-प्रवेष
01. काॅपीराइट, बौद्धिक सम्पदा व पेटेण्ट अधिनियम के अन्तर्गत विष्व के सभी देषों को सार्वजनिक सूचना।02. भूमिका
03. षास्त्र साहित्य समीक्षा
- डाॅ0 कन्हैया लाल, एम.ए., एम.फिल.पीएच.डी (समाजषास्त्र-बी.एच.यू.)
- डाॅ0 राम व्यास सिंह, एम.ए., पीएच.डी (योग, आई.एम.एस-बी.एच.यू.)
04. विष्व या जगत्
05. ब्रह्माण्ड या व्यापार केन्द्र: एक अनन्त व्यापार क्षेत्र
06. ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति
07. ब्लैक होल और आत्मा
08. सौर मण्डल
09. पृथ्वी
10. पुस्तक का मुख-पृश्ठ ष्याम (काला) - ष्वेत (सफेद) क्यों?
11. षुक्रवार,21 दिसम्बर,2012 ई. के बाद षनिवार,22 दिसम्बर,2012 ई. से पाँचवें, प्रथम और अन्तिम स्वर्णयुग का आरम्भ
अ. हिन्दू षास्त्र व मान्यता के अनुसार
1. सामान्य के अनुसार
2. पं0 श्रीराम षर्मा आचार्य के अनुसार
3. अन्य के अनुसार
ब. बौद्ध धर्म के अनुसार
स. मायां कैलण्डर के अनुसार
द. ईसाई षास्त्र के अनुसार
य. यहूदी षास्त्र के अनुसार
र. इस्लाम षास्त्र के अनुसार
ल. सिक्ख धर्म के अनुसार
व. विभिन्न भविश्यवाणीयाँे के अनुसार
ष. उपरोक्त आँकड़ों पर व्याख्या
ह. कल्कि अवतार और लव कुष सिंह ”विष्वमानव“
12. विष्व का सर्वोच्च आविश्कार-मन का विष्वमानक तथा पूर्णमानव निर्माण की तकनीकी
1. आविश्कार क्यों हुआ?
2. आविश्कारकत्र्ता कौन है?
क. भौतिक रूप से-
ख. आर्थिक रूप से-
ग. मानसिक रूप से-
घ. नाम रूप से -
च. समय रूप से -
4. आविश्कार विशय क्या है?
5. आविश्कार की उपयोगिता क्या है?
3. आविश्कार किस प्रकार हुआ?
13. विष्व समाज को अन्तिम सार्वभौम-सत्य संदेष
14. मानवों के नाम खुला चुनौती पत्र
15. प्रारम्भ और अन्त के पहले दिव्य-दृश्टि
16. षास्त्र - संगठन और उसका दर्षन
17. विशय-सूची
विशय - सूची
अध्याय - एक
भाग - 1: ईष्वर, अवतार और पुनर्जन्म
1. ईष्वर और ईष्वर का संक्षिप्त इतिहास
2. अवतार और पुनर्जन्म
3. ईष्वर के अवतार
4. ब्रह्मा के अवतार
5. विश्णु के अवतार
6. षंकर के अवतार
भाग - 2: विश्णु के प्रथम नौ अवतार
अवतार चक्र मार्ग से
(पहले सभी अवतार और अब अन्त में मैं)
पहलायुगः सत्ययुग
अ. व्यक्तिगत प्रमाणित पूर्ण प्रत्यक्ष अवतार
1. प्रथम अवतार
2. द्वितीय अवतार
3. तृतीय अवतार
4. चतुर्थ अवतार
5. पंाचवाॅ अवतार
ब. सार्वजनिक प्रमाणित अंष प्रत्यक्ष अवतार
6. छठा अवतार
दूसरायुगः त्रेतायुग
स. सार्वजनिक प्रमाणित पूर्ण प्रत्यक्ष अवतार
7. सातवाँ अवतार - रामायण
तीसरायुगः द्वापरयुग
द. व्यक्तिगत प्रमाणित पूर्ण प्रेरक अवतार
8. आठवाँ अवतार - महाभारत
चैथायुगः कलियुग
य. सार्वजनिक प्रमाणित अंष प्रेरक अवतार
9. नौवाँ अवतार
भाग - 3: विश्णु के दसवें और अन्तिम अवतार के समय विष्व की स्थिति, उसके विकास की स्थिति एवं परिणाम
क: स्थिति
1. राज्य अर्थात षासन की स्थिति
अ. विष्व स्तर पर राज्य अर्थात् षासन की स्थिति
ब. भारत देष स्तर पर षासन अर्थात् राज्य की स्थिति
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर राज्य अर्थात षासन की स्थिति
द. राज्य अर्थात् षासन स्तर पर राज्य अर्थात् षासन की स्थिति
र. भारतीय परिवार स्तर पर राज्य अर्थात षासन की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर राज्य अर्थात् षासन की स्थिति
2. विज्ञान की स्थिति-
अ. विष्व स्तर पर विज्ञान की स्थिति
ब. भारत देष स्तर पर विज्ञान र्की िस्थति
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर विज्ञान की स्थिति
द. राज्य अर्थात् षासन पर पिज्ञान की स्थिति
य. भारतीय समाज पर विज्ञान की स्थिति
र. भारतीय परिवार पर विज्ञान की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति पर विज्ञान की स्थिति
3. धर्म की स्थिति
अ. विष्व स्तर पर धर्म की स्थिति
ब. भारत देष स्तर पर धर्म की स्थिति
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर धर्म की स्थिति
द. राज्य अर्थात् षासन पर धर्म की स्थिति
य. भारतीय समाज पर धर्म की स्थिति
र. भारतीय परिवार पर धर्म की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति पर धर्म की स्थिति
4. व्यापार की स्थिति
अ. विष्व स्तर पर व्यापार की स्थिति
ब. भारत देष स्तर पर व्यापार की स्थिति
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर व्यापार की स्थिति
द. राज्य अर्थात् षासन पर व्यापार की स्थिति
य. भारतीय समाज पर व्यापार की स्थिति
र. भारतीय परिवार पर व्यापार की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति पर व्यापार की स्थिति
5. समाज की स्थिति:
अ. विष्व स्तर पर समाज की स्थिति
ब. भारत देष स्तर पर समाज की स्थिति
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर समाज की स्थिति
द. राज्य अर्थात् षासन पर समाज की स्थिति
य. भारतीय समाज पर समाज की स्थिति
र. भारतीय परिवार पर समाज की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति पर समाज की स्थिति
6. परिवार केी स्थितिः
अ. विष्व स्तर पर परिवार की स्थिति
ब. भारत देष स्तर पर परिवार की स्थिति
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर परिवार की स्थिति
द. राज्य स्तर पर परिवार की स्थिति
य. भारतीय समाज स्तर पर परिवार की स्थिति
र. भारतीय परिवार स्तर पर परिवार की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर परिवार की स्थिति
7. व्यक्ति की स्थिति
अ. विष्व स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
ब. भारत देष स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
द. राज्य स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
य. भारतीय समाज स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
र. भारतीय परिवार स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर व्यक्ति की स्थिति
ख: स्थिति के विकास की स्थिति
ग: परिणाम
01. राज्य अर्थात् षासन का परिणाम
अ. विष्व स्ता पर राज्य अथवा षासन का परिणाम
ब. भारत देष स्तर पर राज्य अर्थात् षासन का परिणाम
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर राज्य अर्थात् षासन का परिणाम
द. राज्य अर्थात् षासन स्तर पर राज्य अर्थात् षासन का परिणाम
य. भारतीय समाज स्तर पर राज्य अर्थात् षासन का परिणाम
र. भारतीय परिवार स्तर पर राज्य अर्थात् षासन का परिणाम
ल. व्यक्ति स्तर पर राज्य अर्थात् षासन का परिणाम
02. विज्ञान का परिणाम
अ. विष्व स्तर पर विज्ञान का परिणाम
ब. भारत देष स्तर पर विज्ञान का परिणाम
द. राज्य अर्थात् षासन पर विज्ञान का परिणाम
य. भारतीय समाज पर विज्ञान का परिणाम
र. भारतीय परिवार पर विज्ञान का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति पर विज्ञान का परिणाम
03. धर्म का परिणाम
अ. विष्व स्तर पर धर्म का परिणम
ब. भरत देष स्तर पर धर्म का परिणाम
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर धर्म का परिणाम
य. भारतीय समाज पर धर्म का परिणाम
र. भारतीय परिवार पर धर्म का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति पर धर्म का परिणाम
04. व्यापार का परिणाम
अ. विष्व स्तर पर व्यापार का परिणम
ब. भरत देष स्तर पर व्यापार का परिणाम
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर व्यापार का परिणाम
य. भारतीय समाज पर व्यापार का परिणाम
र. भारतीय परिवार पर व्यापार का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति पर व्यापार का परिणाम
05. समाज का परिणाम
अ. विष्व स्तर पर समाज का परिणम
ब. भरत देष स्तर पर समाज का परिणाम
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर समाज का परिणाम
य. भारतीय समाज पर समाज का परिणाम
र. भारतीय परिवार पर समाज का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति पर समाज का परिणाम
06. परिवार का परिणाम
अ. विष्व स्तर पर परिवार का परिणाम
ब. भारत देष स्तर पर परिवार का परिणाम
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर परिवार का परिणाम
द. राज्य स्तर पर परिवार का परिणाम
य. भारतीय समाज स्तर पर परिवार का परिणाम
र. भारतीय परिवार स्तर पर परिवार का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर परिवार का परिणाम
07. व्यक्ति का परिणाम
अ. विष्व स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
ब. भारत देष स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
स. अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
द. राज्य स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
य. भारतीय समाज स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
र. भारतीय परिवार स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
ल. भारतीय व्यक्ति स्तर पर व्यक्ति का परिणाम
08. स्थिति के विकास का परिणाम
09़. विज्ञान का राज्य और धर्म पर प्रभाव
10. ब्रह्माण्डीय स्थिति और परिणाम
11. विष्व के समक्ष भारत की स्थिति और परिणाम
12. दृष्य पदार्थ विज्ञान और अदृष्य आध्यात्म विज्ञान-स्थिति एवं परिणाम
भाग - 4: विश्णु के दसवें और अन्तिम अवतार
पाँचवाँयुगः स्वर्णयुग/सत्ययुग
र. सार्वजनिक प्रमाणित पूर्ण प्रेरक अवतार
10. दसवाँ और अन्तिम अवतार - विष्वभारत
पूर्व कथा -
भविश्य के लिए प्रक्षेपित कल्कि अवतार की कथा
वैश्णों देवी की कथा
उपरोक्त कथा द्वारा कल्कि अवतार एवं वैश्णों देवी का सम्बन्ध
काषी का परिचय
वर्तमान कथा -
वर्तमान में व्यक्त कल्कि अवतार की कथा
कलयुग की देवी कल्कि देवी की कथा
कल्कि देवी का परिचय एवं रूप
सत्यकाषी: काषी (वाराणसी)-सोनभद्र-षिवद्वार-विन्ध्याचल
के बीच का क्षेत्र का परिचय
सत्यकाषी में षास्त्र से सम्बन्धित स्थल
जरगो नदी और लवकुष सिंह ”विष्वमानव“
जरगो बाँध: एक दिव्य स्थल निर्माण क्षेत्र
धर्म स्थापनार्थ दुश्ट वध और साधुजन का कल्याण कैसे और किसका?
भाग - 5: जन्म, ज्ञान व कर्म परिचय (सारांष)
1. योगेष्वर श्री कृश्ण
2. स्वामी विवेकानन्द
3. भोगेष्वर श्री लवकुष सिंह ”विष्वमानव“
4. स्वामी विवेकानन्द की वाणीयाँ जो भोगेष्वर श्री लवकुष सिंह”विष्वमानव“ के जीवन में सत्य है।
5. स्वामी विवेकानन्द और भोगेष्वर श्री लवकुष सिंह ”विष्वमानव“ के जीवन काल का घटना-चक्र
अध्याय - दो: जीवन परिचय
भाग - 1: मानव सभ्यता का विकास और जाति की उत्पत्ति
1. वंश
अ.ब्रह्म वंश
ब.सूर्य (विवस्वान) वंश
(क) कुश वंश
(ख) लव वंश
स.चन्द्र (ऐल) वंश
2. गोत्र
3. आदि पुरूश महर्शि कूर्म-कश्यप
अ. कूर्मवंशी क्षत्रिय के वंश
ब. कूर्मवंशी क्षत्रिय के कुछ कुल
स. कूर्मवंशी क्षत्रिय के कुछ उपाधियाँ
द. कूर्मवंशी क्षत्रिय रियासतें
य. कूर्मवंशी क्षत्रिय वंश के महान विभूतियाँ
भाग - 2: 1. पारिवारीक पृश्ठभूमि
2. जन्म
3. जन्म एवं निवास स्थल
4. जन्म कुण्डली
5. हथेली व पैर के तलवे का चित्र
भाग - 3: षिक्षा, भ्रमण व देषाटन
भाग - 4: मित्र व सहयोगी
भाग - 5: जीवन यात्रा कें कुछ रोचक चरित्र व घटनायें
अध्याय - तीन: ज्ञान परिचय
भाग -1: धर्म
भाग -2: पुराण रहस्य
1. महर्शि व्यास पौराणिक कथा लेखन कला
2. पुराणः धर्म, धर्मनिरपेक्ष एवम् यथार्थ अनुभव की अन्तिम सत्य दृश्टि
क. पुराणों की सत्य दृश्टि
ख. ब्रह्मा अर्थात् एकात्मज्ञान परिवार
ग. विश्णु अर्थात एकात्म ज्ञान सहित एकात्म कर्म परिवार
घ. षिव-षंकर अर्थात एकात्म ज्ञान और एकात्म कर्म सहित एकात्म ध्यान परिवार
च. ब्रह्माण्ड परिवार
3. ”गीता“ का अन्त तथा ”कर्मवेद“ के प्रारम्भ का आधार
4. कालभैरव कथा: कर्मवेद: प्रथम, अन्तिम तथा पंचमवेदषिव-षंकर अधिकृत है, ब्रह्मा अधिकृत नहीं
5. षिव और जीव
भाग -3: विष्व-नागरिक धर्म का धर्मयुक्त धर्मषास्त्र
कर्मवेद: प्रथम, अन्तिम तथा पंचम वेदीय श्रृंखला
भाग -4: विष्व-राज्य धर्म का धर्मनिरपेक्ष धर्मषास्त्र
विष्वमानक षून्य-मन की गुणवत्ता का विष्वमानक श्रृंखला
उप भाग-1: मानक एवं मानकीकरण संगठन परिचय
प्ण् मानक एवं मानकीकरण संगठन
प्प्ण् अन्तर्राश्ट्रीय माप-तौल ब्यूरो
प्प्ण् अन्तर्राश्ट्रीय मानकीकरण संगठन ;प्ैव्द्ध
प्टण् भारतीय मानक ब्यूरो ;ठप्ैद्ध
टण् मानक के सम्बन्ध में विभिन्न वक्तव्य व्यक्ति भी हो सकते हैं आई. एस. ओ. मार्का
1. पं0 जवाहर लाल नेहरु
2. श्री मती इन्दिरा गाँधी
3. श्री राजीव गाँधी
4. डब्ल्यू0.टी.कैबेनो.
5. श्री कोफी अन्नान (नोबेल षान्ति पुरस्कार से सम्मानित) पूर्व महासचिव, संयुक्त राश्ट्र संघ
पहले मानक के सम्बन्ध में विभिन्न वक्तव्य और अब अन्त में मेरा वक्तव्य और विष्वमानक
- लवकुष सिंह ”विष्वमानव“
उप भाग-2: गणराज्य व संघ परिचय
प्ण् राज्य व गणराज्य: उत्पत्ति और अर्थ
प्प्ण् भारत गणराज्य: संक्षिप्त षासकीय परिचय
प्प्प्ण् संयुक्त राश्ट्र संघ ;न्छव्द्ध: परिचय, उद्देष्य एवम् कार्यप्रणाली
1. वीटो पावर - संयुक्त राज्य अमेरिका ;न्ैद्ध
2. वीटो पावर - फ्रांस
3. वीटो पावर - रूस
4. वीटो पावर - चीन
5. वीटो पावर - ब्रिटेन ;न्ज्ञद्ध
प्टण् गणराज्य: अन्तिम विष्व षासन प्रणाली
टण् ग्राम सरकार व विष्व सरकार: एक प्रारूप
उप भाग-3: मन की गुणवत्ता का विष्वमानक परिचय
प्ण् आविश्कार विशय और उसकी उपयोगिता
प्प्ण् विष्वकल्याणार्थ आविश्कार की स्थापना कब और कैसे?
प्प्प्ण् वैष्विक मानव निर्माण तकनीकी- ॅब्ड.ज्स्ड.ैभ्ल्।डण्ब् प्रणाली
तकनीकी का नाम ैभ्ल्।डण्ब् क्यों?
ै . ै।ज्ल्। ( सत्य )
भ्. भ्म्।त्ज् ( हृदय )
ल्. ल्व्ळ ( योग )
। . ।ैभ्त्।ड ( आश्रम )
ड . डम्क्प्ज्।ज्प्व्छ ( ध्यान )
ण् . क्व्ज् ( बिन्दु या डाॅट या दषमलव या पूर्णविराम )
ब् . ब्व्छब्प्व्न्ैछम्ैै ( चेतना )
प्टण् आदर्ष वैष्विक मानव/जन/गण/लोक/स्व/मैं/आत्मा/तन्त्र का सत्य रूप
टण् विष्व मानक-षून्य ;ॅै.0द्ध: मन की गुणवत्ता का विष्व मानक श्रृखंला
1. डब्ल्यू.एस. ;ॅैद्ध.0 ः विचार एवम् साहित्य का विष्वमानक
2. डब्ल्यू.एस. ;ॅैद्ध.00ः विशय एवम् विषेशज्ञों की परिभाशा का विष्वमानक
3. डब्ल्यू.एस. ;ॅैद्ध.000ः ब्रह्माण्ड (सूक्ष्म एवम् स्थूल) के प्रबन्ध और क्रियाकलाप का विष्वमानक
ईष्वर नाम
अदृष्य एवं दृष्य ईष्वर नाम
अदृष्य ईष्वर नाम-”ऊँ“षब्द का दर्षन
दृष्य ईष्वर नाम- ज्त्।क्म् ब्म्छज्त्म् षब्द का दर्षन
ट्रेड सेन्टर के सात चक्र
दृष्य सात चक्र के आधार पर संचालक के प्रकार
दृष्य योग और दृष्य ध्यान
1. षासन प्रणाली का विष्वमानक
2. संचालक का विष्वमानक
अवतारी (सत्य युक्त, संयुक्तमन) षासन बनाम मानवी (सत्यरहित संयुक्तमन) षासन प्रणाली
3. गणराज्य या लोकतन्त्र के स्वरूप का विष्वमानक
4. संविधान के स्वरूप का विष्वमानक
5. षिक्षा व षिक्षा पाठ्यक्रम के स्वरूप का विष्वमानक
4. डब्ल्यू.एस. ;ॅैद्ध.0000ः मानव (सूक्ष्म तथा स्थूल) के प्रबन्ध और क्रियाकलाप का विष्वमानक
5. डब्ल्यू.एस. ;ॅैद्ध.00000ः उपासना और उपासना स्थल का विष्वमानक
उप भाग-4: पत्रावली, षंखनाद एवं जनहित याचिका का प्रारूप
1. समय-समय पर वितरित मुद्रित सामग्री
2. समय-समय पर भेजे गये पत्र
3. समय-समय पर प्राप्त पत्र
4. षंखनाद
01. नागरिको को आह्वान
02. विचारको को आह्वान
03. शिक्षण क्षेत्र से जुड़े आचार्याे को आह्वान
04. प्रबंध शिक्षा क्षेत्र को आह्वान
05. शिक्षा पाठ्यक्रम निर्माता को आह्वान
06. पत्रकारिता को आह्वान
07. मानकीकरण संगठन और औद्योगिक जगत को आह्वान
08. फिल्म निर्माण उद्योग को को आह्वान
09. धर्म क्षेत्र को आह्वान
10. राजनीतिक दलो को आह्वान
11. सरकार / षासन को आह्वान
12. संसद को आह्वान
13. सर्वोच्च न्यायालय को आह्वान
5.जनहित याचिका का प्रारूप
1. पूर्ण षिक्षा का अधिकार
2. राश्ट्रीय षास्त्र
3. नागरिक मन निर्माण का मानक
4. सार्वजनिक प्रमाणित सत्य-सिद्धान्त
5. गणराज्य का सत्य रूप
उप भाग-5: ईष्वर का मस्तिश्क, मानव का मस्तिश्क और कम्प्यूटर
भाग -5: विष्व षान्ति का अन्तिम मार्ग
1. एकात्मकर्मवाद और विष्व का भविश्य
2. विष्व का मूल मन्त्र- ”जय जवान- जय किसान- जय विज्ञान- जय ज्ञान-जय कर्मज्ञान“
3. विष्वमानक-षून्य श्रंृखला (निर्माण का आध्यात्मिक न्यूट्रान बम)
4. भारत का संकट, हल, विष्वनेतृत्व की अहिंसक स्पश्ट दृष्य नीति, सर्वोच्च संकट और विवषता
5. गण्राज्य-संघ को मार्गदर्षन
प्ण् गणराज्यों के संघ-भारत को सत्य और अन्तिम मार्गदर्षन
प्प्ण् राश्ट्रो के संघ - संयुक्त राश्ट्र संघ को सत्य और अन्तिम मार्गदर्षन
प्प्प्ण् अवतारी संविधान से मिलकर भारतीय संविधान बनायेगा विष्व सरकार का संविधान
प्टण् ”भारत“ के विष्वरूप का नाम है-”इण्डिया“
टण् विष्व सरकार के लिए पुनः भारत द्वारा षून्य आधारित अन्तिम आविश्कार
- षून्य का प्रथम आविश्कार का परिचय
- षून्य आधारित अन्तिम आविश्कार का परिचय
अध्याय - चार: कर्म परिचय
(सार्वजनिक प्रमाणित दृष्य महायज्ञ)
1. विष्व षान्ति
2. विष्व धर्म संसद
1. विष्व धर्म संसद-सन् 1893 ई0 परिचय
स्वामी विवेकानन्द के व्याख्यान,
1. धर्म महासभा-स्वागत भाशण का उत्तर, दिनांक 11 सितम्बर, 1893
2. हमारे मतभेद का कारण, 15 सितम्बर, 1893
3. हिन्दू धर्म, 19 सितम्बर, 1893
4. धर्म भारत की प्रधान आवश्यकता नहीं, 20 सितम्बर, 1893
5. बौद्ध धर्म, 26 सितम्बर, 1893
6. धन्यवाद भाशण, 27 सितम्बर, 1893
2. विष्व धर्म संसद-सन् 1993 ई0 परिचय
3. विष्व धर्म संसद-सन् 1999 ई0 परिचय
4. विष्व धर्म संसद-सन् 2004 ई0 परिचय
5. विष्व धर्म संसद-सन् 2009 ई0 परिचय
3. संयुक्त राश्ट्र संघ द्वारा आयोजित सहस्त्राब्दि सम्मेलन-2000 ई0
1. राश्ट्राध्यक्षों का सम्मेलन
2. धार्मिक एवं आध्यात्मिक नेताओं का सम्मेलन
4. विष्व षान्ति के लिए गठित ट्रस्टों की स्पश्ट नीति
5. मेरे विष्व षान्ति के कार्य हेतू बनाये गये सभी ट्रस्ट मानवता के लिए सत्य-कार्य एवं दान के लिए सुयोग्य पात्र
भाग - 1: सत्ययोगानन्द मठ (ट्रस्ट)
भाग - 2: प्राकृतिक सत्य मिषन (ट्रस्ट)
1. राश्ट्रीय रचनात्मक आन्दोलनःस्वायत्तषासी उपसमिति / संगठन
प्ण् प्राकृतिक सत्य एवं धार्मिक षिक्षा प्रसार केन्द्र (ब्म्छज्त्म्)
प्प्ण् ट्रेड सेन्टर (ज्त्।क्म् ब्म्छज्त्म्)
प्प्प्ण् विष्व राजनीतिक पार्टी संघ (ॅच्च्व्)
(क) परिचय
(ख) राश्ट्रीय क्रान्ति मोर्चा
(ग) राश्ट्रीय सहजीवन आन्दोलन
(घ) स्वराज-सुराज आन्दोलन
(च) विष्व एकीकरण आन्दोलन (सैद्धान्तिक)
2. प्राकृतिक सत्य मिषन के विष्वव्यापी स्थापना का स्पश्ट मार्ग
3. राम कृश्ण मिषन और प्राकृतिक सत्य मिषन
भाग - 3: विष्वमानव फाउण्डेषन (ट्रस्ट)
भाग - 4: सत्यकाषी ब्रह्माण्डीय एकात्म विज्ञान विष्वविद्यालय (ट्रस्ट)
भाग - 5: सत्यकाषी (ट्रस्ट)
अध्याय-पाँचःसार्वजनिक प्रमाणित विष्वरूप
भाग - 1: चक्रान्त
01. पुर्नजन्म चक्र मार्ग से
पहले स्वामी विवेकानन्द और अब अन्त में मैं
02. अवतार चक्र मार्ग से
पहले सभी अवतार और अब अन्त में मैं
03. धर्म प्रवर्तक और उनका धर्म चक्र मार्ग से
धर्म ज्ञान का प्रारम्भ
01.वैदिक धर्म-ऋशि-मुनि गण-ईसापूर्व 6000-2500
सत्ययुग के धर्म
02.ब्राह्मण धर्म-ब्राह्मण गण-ईसापूर्व 6000-2500
त्रेतायुग के धर्म
03.वैदिक धर्म-श्रीराम-ईसापूर्व 6000-2500
द्वापरयुग के धर्म
04.वेदान्त अद्वैत धर्म-श्रीकृश्ण-ईसापूर्व 3000
कलियुग के धर्म
05.यहूदी धर्म
06.पारसी धर्म-जरथ्रुसट-ईसापूर्व 1700
07.बौद्ध धर्म-भगवान बुद्ध-ईसापूर्व 1567-487
08.कन्फ्यूसी धर्म-कन्फ्यूसियष-ईसापूर्व 551-479
09.टोईज्म धर्म-लोओत्से-ईसापूर्व 604-518
10.जैन धर्म-भगवान महावीर-ईसापूर्व 539-467
11.ईसाइ धर्म-ईसा मसीह-सन् 33 ई0
12.इस्लाम धर्म-मुहम्मद पैगम्बर-सन् 670 ई0
13.सिक्ख धर्म-गुरु नानक-सन् 1510 ई0
स्वर्णयुग धर्म (धर्म ज्ञान का अन्त)
पहले विभिन्न धर्म प्रवर्तक और अब अन्त में मैं और मेरा विष्वधर्म
14.विष्व/सत्र्य/धर्मनिरपेक्ष धर्म-लवकुष सिंह”विष्वमानव“-सन् 2012 ई0
04. आचार्य और दर्षन चक्र मार्ग से
ब. आस्तिक ईष्वर कारण है अर्थात ईष्वर को मानना
अ. स्वतन्त्र आधार
1. कपिल मुनि - संाख्य दर्षन
2. पतंजलि- योग दर्षन
3. महर्शि गौतम- न्याय दर्षन
4. कणाद- वैषेशिक दर्षन
ब. वैदिक ग्रन्थों पर आधारित
अ. कर्मकाण्ड पर आधारित
1. जैमिनि- मीमांसा दर्षन
ब. ज्ञानकाण्ड अर्थात उपनिशद् पर आधारित
1. द्वैताद्वैत वेदंात दर्षन - श्रीमद् निम्बार्काचार्य
2. अद्वैत वेदंात दर्षन - आदि षंकराचार्य
3. विषिश्टाद्वैत वेदंात दर्षन - श्रीमद् रामानुजाचार्य
4. द्वैत वेदंात दर्षन - श्रीमद् माध्वाचार्य
5. षुद्धाद्वैत वेदंात दर्षन - श्रीमद् वल्लभाचार्य
ब. नास्तिक - ईष्वर कारण नहीं है अर्थात ईष्वर को न मानना
1. चार्वाक- चार्वाक दर्षन
2. भगवान महावीर- जैन दर्षन
3. भगवान बुद्ध- बौद्ध दर्षन
पहले विभिन्न आचार्य तथा उनके दर्षन और अब अन्त में मैं और मेरा विकास दर्षन
05. गुरू चक्र मार्ग से
1. श्री रामकृश्ण परमहंस एवं श्रीमाँ षारदा देवी
2. महर्शि अरविन्द
3. आचार्य रजनीष ”ओषो“
4. श्री सत्योगानन्द उर्फ भुईधराबाबा
5. श्री श्री रविषंकर
पहले विभिन्न गुरू और अब अन्त में मैं
06. संत चक्र मार्ग से
1. संत श्री रामानन्द
2. गोरक्षनाथ
3. धर्म सम्राट करपात्री जी
4. सांई बाबा षिरडी वाले
5. अवधूत भगवान राम
पहले विभिन्न संत और अब अन्त में मैं
07. समाज और सम्प्रदाय चक्र मार्ग से
1. राजाराम मोहन राय-ब्रह्म समाज
2. केषवचन्द्र सेन-प्रार्थना समाज
3. स्वामी दयानन्द-आर्य समाज
4. श्रीमती एनीबेसेन्ट-थीयोसोफीकल सोसायटी
5. स्वामी विवेकानन्द-राम कृश्ण मिषन
पहले विभिन्न समाज सुधारक और अब अन्त में मेरा ईष्वरीय समाज
08. सत्य षास्त्र-साहित्य चक्र मार्ग से
1. श्री हरिवंष राय बच्चन - ”मधुषाला“
2. स्वामी अड़गड़ानन्द - ”यथार्थ गीता“
3. श्री मनु षर्मा - ”कृश्ण की आत्मकथा“
4. श्री बिल गेट्स - ”बिजनेस / द स्पीड आॅफ थाॅट“
5. श्री स्टीफेन हाॅकिंग -”समय का संक्षिप्त इतिहास“
पहले विभिन्न सत्य षास्त्र-साहित्य और अब अन्त में मेरा विष्वषास्त्र
09. कृति चक्र मार्ग से
1. पं0 मदन मोहन मालवीय - ”काषी हिन्दू विष्वविद्यालय (वाराणसी)“
2. पं0 श्रीराम षर्मा आचार्य -”अखिल विष्व गायत्री परिवार (ऋृशिकेष)“
3. नानाजी देषमुख -”दीनदयाल षोध संस्थान (चित्रकूट)“
4. महर्शि महेष योगी -”महर्शि यूनिवर्सिटी आॅफ मैनेजमेन्ट“
5. बाबा रामदेव -”पंतजलि योगपीठ (हरिद्वार)“
पहले विभिन्न कृति और अब अन्त में मेरी कृति- सत्यकाषी ब्रह्माण्डीय एकात्म विज्ञान विष्वविद्यालय
10. भूतपूर्व धार्मिक-राजनैतिक-सामाजिक नेतृत्वकर्ता चक्र मार्ग से
(भारत तथा विष्व के नेत्तृत्वकत्र्ताओं के चिंतन पर दिये गये वक्तव्य का स्पश्टीकरण)
01. महात्मा गाँधी
02. पं0 जवाहर लाल नेहरु
03. लाल बहादुर षास्त्री
04. सर्वपल्ली राधाकृश्णनन्
05. सरदार वल्लभ भाई पटेल
06. राम मनोहर लोहिया
07. पं0 दीन दयाल उपाध्याय
08. बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर
09. लोकनायक जय प्रकाष नारायण
10. श्री विष्वनाथ प्रताप सिंह
11. श्री के.आर.नारायणन
12. श्री षंकर दयाल षर्मा
13. श्री आर.वेंकटरामन
14. पोप जाॅन पाल, द्वितीय
15. श्री चन्द्रषेखर
पहले विभिन्न भूतपूर्व धार्मिक-राजनैतिक-सामाजिक नेतृत्वकर्ता और अब अन्त में मैं
11. वर्तमान धार्मिक-राजनैतिक-सामाजिक नेतृत्वकर्ता चक्र मार्ग से
(भारत तथा विष्व के नेत्तृत्वकत्र्ताओं के चिंतन पर दिये गये वक्तव्य का स्पश्टीकरण)
01. भारतीय संसद
02. भारतीय सर्वोच्च न्यायालय
03. विष्व षान्ति सम्मेलन
04. स्वामी स्वरूपानन्द
05. श्री रोमेष भण्डारी
06. श्री अटल बिहारी वाजपेयी
07. श्री मुरली मनोहर जोषी
08. स्वामी षिवानन्द
09. श्रीमती सोनिया गाँधी
10. श्री केषरी नाथ त्रिपाठी
11. दलाई लामा
12. जयेन्द्र सरस्वती
13. श्री अषोक सिंघल
14. श्री के. एस. सुदर्षन
15. श्री परषुराम वी. सावंत
16. श्री बिल क्लिन्टन
17. श्री कौफी अन्नान
18. श्री लाल कृश्ण आडवाणी
19. श्री वी.एस.नाॅयपाल
20. श्री मती षीला दीक्षित
21. श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
22. श्री बराक ओबामा
23. श्री बी.एल.जोषी
24. श्री एस.एन.श्रीवास्तव
25. श्री एच.आर.भारद्वाज
26. श्री फर्दिनो इनासियो रिबेलो
27. श्री गिरधर मालवीय
28. डाॅ0 कर्ण सिंह
29. श्री हामिद अंसारी
30. श्रीमती प्रतिभा पाटिल
31. श्री यदुनाथ सिंह
32. बाबा रामदेव
33. श्री अन्ना हजारे
34. श्री सैम पित्रोदा
पहले विभिन्न वर्तमान धार्मिक-राजनैतिक-सामाजिक नेतृत्वकर्ता और अब अन्त में मैं
12. सत्यमित्रानन्द गिरी -”भारत माता मन्दिर (ऋृशिकेष)“
पहले भारतमाता मन्दिर और अब अन्त में उसमें मैं और मेरा विष्वधर्म मन्दिर
13. पहले मैं और अब अन्त में मैं ही मैं
भाग - 2: वार्ता, वक्तव्य एवम् दिषाबोध
भाग - 3: सत्य-अर्थ एवम् मार्गदर्षन
भाग - 4: वाणीयाँ एवम् उद्गार
भाग - 5: मैं (व्यक्तिगत या सार्वभौम)
01. क्यों असम्भव था व्यक्ति, संत-महात्माओं-धर्माचार्यो, राजनेताओं और विद्वानो द्वारा यह अन्तिम कार्य ?
02. भोगेष्वर रुप (कर्मज्ञान का विष्वरुप): मैं एक हूँ परन्तु अनेक नामों से जाना जाता हूँ
03. एक ही मानव षरीर के जीवन, ज्ञान और कर्म के विभिन्न विशय क्षेत्र से मुख्य नाम
(सर्वोच्च, अन्तिम और दृष्य)
04. एक ही ”विष्वषास्त्र“ साहित्य के विभिन्न नाम और उसकी व्याख्या
05. बसुधैव कुटुम्बकम्
परिषिश्ट - अ - स्वामी विवेकानन्द
1. धर्म-विज्ञान
2. योग क्या है?
3. ज्ञान योग
4. राजयोग
5. भक्ति योग
6. प्रेम योग
7. कर्मयोग
परिषिश्ट - ब - लवकुष सिंह ”विष्वमानव“
1. निर्माण के मार्ग
2. मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा
3. ईष्वर, अवतार और मानव की षक्ति सीमा
4. पाँचवें युग - स्वर्णयुग में प्रवेष का आमंत्रण
5. मैं-विष्वात्मा ने भारतीय संविधान की धारा-51 (ए): नागरिक का मौलिक कत्र्तव्य अनुसार अपना धर्म कत्र्तव्य निभाया
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